Saturday, 26 January 2013

इक क़दम और...

ज़िन्दगी की राह अब कुछ सुल्झी हुई सी लगती है
बेचैन है फिर भी मन मेरा, हर दिशा में भागे है
इक उस सवेरे की तलाश में, न जाने कितनी रातें जागा हूँ
हर कदम एक नया संघर्ष, एक नयी दीवानगी है
जो है साथ तेरा, तोह चलूँ इक क़दम और...

कितनी राहें बदल गई, नई मंज़िलो की तलाश में
यादें तो हमारी आज भी बसी है, उन गलियों की आवाज़ में
बातें बयाँ करने का अंदाज़ कुछ बदला हुआ सा लगता है 
है यह मासूमियत उनकी, या है कोई आगाज़ नई शुरुवात का 
हर कदम पर है मुस्कुराहट चेहरे पे, नए लक्क्ष्य की चाह है
जो है साथ तेरा, तोह चलूँ इक क़दम और...

है जुस्तुजू कई दबी हुईं, इस दिल के दरमियाँ

हैं राज़ छुपाए कई, तो कई ख्वाब संभाले हुए
कई ज़ुबान मदहोश हैं, तो कई ज़ुबान खामोश
हर कहानी से बनती, ज़िन्दगी की नई कहानी है
हर कदम पर मिलते नए साथी, हमें तो बस चाह तुम्हारी है
जो है साथ तेरा, तोह चलूँ इक क़दम और...

ज़िन्दगी की साँसें कुछ यूँ थम जाएँगी 
होगी न कुछ खबर और आँखे नम हो जाएँगी
जिस कशमकश में हूँ मैं, कुछ यूँ दूर हो जाएगी
जश्न-ए-महफ़िल भी फीकी सी नज़र आएगी
हर कदम एक नई सुबह का आग़ाज़ लेकर आएगी 
जो है साथ तेरा, तोह चलूँ इक क़दम और...

चलते चलते ये लफ्ज़ कुछ यूँ गुनगुनायेंगे 

ख़ामोश होगा सारा जहाँ, और आप गायेंगे
आप और मैं कुछ इस तरह मुस्कुराएंगे 
एक दुसरे की बाहों में इस तरह खो जायेंगे
हर कदम ख़ुशी और ग़म साथ निभाने का वादा हे 
जो है साथ तेरा, तोह चलूँ इक क़दम और...

जो है साथ तेरा, तोह चलूँ इक क़दम और
जो है साथ तेरा, तोह चलूँ इक क़दम और...


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